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अजित द्विवेदी All Article

एक साथ चुनाव, आइडिया अच्छी नहीं!

लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की बहस तेज गति से आगे बढ़ रही है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद बहस और विचार के लिए यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया था और पढ़ें....

संघ की इच्छा, सोच और सरकार

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने विजयादशमी के अपने संबोधन में इस बार कुछ ऐसी बातें कहीं, जो वे केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने और भाजपा का चतुर्दिक विजय अभियान शुरू होने के बाद पिछले तीन साल में नहीं कही थी। और पढ़ें....

विकास का रूपक और विडंबना बनना!

क्या‍ विकास को मेटाफर या रूपक माना जा सकता है? और क्या विकास का एक विडंबना के तौर पर मजाक उड़ाया जा सकता है? आमतौर पर विकास एक स्थूल सी अवधारणा है, जिसे कई रूपों में परिभाषित किया जाता है। और पढ़ें....

राहुल के रास्ते की बाधा क्या है?

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में उस सवाल का जवाब दिया, जिसका सामना उनकी दादी, उनके पिता, उनकी मां और वे खुद बरसों से कर रहे थे, लेकिन कभी किसी ने दो टूक जवाब नहीं दिया था। और पढ़ें....

भाजपा के लिए इतिहास का सबक!

भारतीय जनता पार्टी उत्तर व मध्य भारत के चार पांच राज्यों और गुजरात, कर्नाटक से निकल कर अखिल भारतीय पार्टी हो गई है। इस समय उसके सबसे ज्यादा सांसद और सबसे ज्यादा विधायक भी हैं। और पढ़ें....

इस फेरबदल का क्या मकसद है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार में तीसरी बार फेरबदल किया है। उनकी सरकार तीन साल पुरानी है और उन्होंने औसतन एक साल में एक बार बदलाव किया है। उन्होंने शुरू में बहुत छोटा मंत्रिमंडल बनाया था। और पढ़ें....

बाबाओं का धर्म से क्या लेना देना?

हरियाणा में सिरसा स्थिति डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा के बलात्कारी साबित होने और जेल भेजे जाने के बाद मीडिया और सोशल मीडिया में इस पर बहस चल रही है कि आखिर ऐसे धर्मगुरुओं से देश, समाज और खुद धर्म का क्या भला होना है? और पढ़ें....

दो ध्रुवीय राजनीति की नींव!

भारत में दो पार्टियों वाली राजनीति की सदिच्छा बहुत पहले से जताई जाती रही है। अमेरिका की तरह दो दलीय प्रणाली की बात गाहेबगाहे उठती रही है। भारत जैसे विविधता वाले देश में यह तो संभव नहीं है और पढ़ें....

भारतीय राजनीति का भाजपा युग!

भारतीय राजनीति ने कई पार्टियों का राज देखा है और कई तरह के उतार चढ़ाव भी देखे हैं। आजादी के बाद पहले तीन दशक तक कांग्रेस युग देखा है तो उसके बाद कांग्रेस का पराभव, समाजवादी युग, गठबंधन का दौर और भाजपा युग का आगाज देखा है। और पढ़ें....

य़े कैसे भारत रत्न और महानायक?

भारत देश की यह त्रासदी है कि यहां जो जितना बड़ा है, वह उतना ज्यादा मजबूर है, वह उतना ज्यादा खामोश है और उतना ही ज्यादा अपने सामाजिक, राष्ट्रीय सरोकारों से दूर है। और पढ़ें....

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अजित द्विवेदी

अजित द्विवेदी

dajeet@gmail.com

Ajeet Dwivedi is the Editor(News) of NAYA INDIA and brings over 16 years of experience as a reporter and editor. Ajeet started his journalistic career as a reporter at Jansatta in 1996. In 1997, he joined Samvad Parikrama- News and Feature Agency serving as the reporter for the agency’s various publications. In 2000 he started working as News Coordinator and content developer for Netcom India Pvt Ltd. From 2003 to 2007, he was associated with Dainik Bhashkar has as an Assistant Editor, where apart from the opinion page he was also in charge of planning special features and stories for Bhashkar’s Sunday review page. After a successful stint in the print industry, in 2007, he took the leap and ventured into electronic media and joined India News. There he was not only an Executive Editor but was also part of the core team instrumental in establishing the channel. In 2010, Ajeet came onboard NAYA INDIA as Editor. He helps oversee NAYA INDIA’s editorial content and writes weekly columns on contemporary issues which stare India in the face.

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